गोडसेवादी विचारधारा से जुड़े लोगों ने महात्मा गांधी के नाम से इतनी एलर्जी क्यों दिखाई? : प्रमोद
खैरागढ़, Manrega Bachao Sangram:जिला कांग्रेस कमेटी खैरागढ़ द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर **“जी-राम-जी”** किए जाने के विरोध में आज एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता को कांग्रेस के **राष्ट्रीय सह प्रभारी (छत्तीसगढ़) विजय जांगिड़** एवं **जिला समन्वयक केसीजी व रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे** ने संबोधित किया।
इस दौरान विजय जांगिड़ ने कहा कि **मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं थी**, बल्कि कांग्रेस शासनकाल में इसे मजदूरों के लिए **रोजगार की कानूनी गारंटी और सम्मान** के रूप में लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सौ दिन के रोजगार की गारंटी पूरे देश में कानून के तहत दी थी, जबकि भाजपा ने इसे कानून से हटाकर केवल एक योजना (स्कीम) बना दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की मानसिकता ग्रामीण मजदूरों को कमजोर करने की रही है। इसी सोच के तहत न केवल योजना का नाम बदला गया, बल्कि इसके प्रारूप में भी बदलाव किया गया है। पहले राज्य का अंशदान 10 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे।
पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि **गोडसेवादी विचारधारा से जुड़े लोगों ने महात्मा गांधी के नाम से इतनी एलर्जी क्यों दिखाई?** ऊपर से गांधी का नाम लेने और नीचे से उनकी विचारधारा को कमजोर करने का दोहरा चरित्र भाजपा की पहचान बन चुका है।
उन्होंने कहा कि भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और रोजगार का अधिकार कांग्रेस की देन है, जबकि भाजपा केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है। 125 दिन रोजगार करने का दावा करने वाली भाजपा यह बताए कि इससे छत्तीसगढ़ के मजदूरों को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा।
प्रेस वार्ता में **खैरागढ़ विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा**, **पूर्व विधायक गिरवर जंघेल**, **जिला कांग्रेस अध्यक्ष कोमल साहू** सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।




