खैरागढ़।श्रीमद्भागवत कथा साक्षात मोक्षस्वरूप है—इसी भाव के साथ ग्राम अछोली (बाजार अतरिया, खैरागढ़) में 10 जनवरी से 18 जनवरी तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भागवत रस का पान कर रहे हैं।
इस पावन आयोजन के कथा व्यास सुप्रसिद्ध अध्यात्मवेत्ता पं. मनोज शर्मा (भंडारपुर, डोंगरगढ़) हैं। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मानव मात्र को परम सुख और परम शांति केवल अध्यात्म से ही प्राप्त हो सकती है, और अध्यात्म का संपूर्ण सार श्रीमद्भागवत कथा में निहित है। भागवत कथा ही जीव को परमात्मा से जोड़ने का एकमात्र माध्यम है।
कथा प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए पं. मनोज शर्मा ने राजा परीक्षित और श्रृंगी ऋषि के श्राप का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि तक्षक सर्प के डसने से मृत्यु का श्राप सुनकर राजा परीक्षित ने सांसारिक चिंता छोड़ भगवत चिंतन का आश्रय लिया और सद्गुरु भगवान श्री शुकदेव जी से भागवत कथा का श्रवण कर भगवत गति को प्राप्त किया।
भागवत का मूल उद्देश्य बताते हुए उन्होंने “पिबत भागवतं रसालयम्” श्लोक का अर्थ समझाया—जब तक शरीर में चेतना है, तब तक भगवत रस का पान करते रहना चाहिए।
कथा के माध्यम से ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य के पास जीवन तो है, लेकिन जीवन जीने की कला नहीं है—भागवत कथा वही कला सिखाती है।
प्रह्लाद प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि “हरि सर्वभूतेषु” के भाव से भक्त प्रह्लाद को खंभे में भगवान के दर्शन हुए, लेकिन अहंकार में डूबे हिरण्यकशिपु को नहीं। इसका तात्पर्य है कि जहां भक्ति की दृष्टि होती है, वहीं भगवान का दर्शन होता है।
समुद्र मंथन कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि भक्ति रूपी अमृत प्राप्त करने के प्रयास में कभी-कभी मन रूपी मंदराचल डगमगाने लगता है, तब आत्मज्ञान के प्रतीक भगवान कच्छप रूप में आधार प्रदान करते हैं। अमृत से पूर्व निकले विष को भगवान शिव ने पान किया—अर्थात संताप रूपी विष को ग्रहण करने वाला ही शिव होता है।

वामन अवतार, श्रीकृष्ण जन्म, पूतना वध, चीरहरण लीला सहित अनेक प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने देहाभिमान, अहंकार और भक्ति के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि देहाभिमान के रहते श्रीकृष्ण की प्राप्ति संभव नहीं है। गोपियां जब देहाभिमान से परे हुईं, तभी उन्हें भगवान का सानिध्य प्राप्त हुआ।
सकट महोत्सव पर्व के अवसर पर आयोजित इस कथा में श्रोताओं की अपार भीड़ उमड़ रही है और श्रद्धालु संगीतमय भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं।
इस आयोजन का आयोजन जगन्नाथ वर्मा, रेखाबाई एवं समस्त वर्मा परिवार, ग्राम अछोली (बाजार अतरिया, खैरागढ़) के तत्वावधान में किया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति की जानकारी पूणम वर्मा, टुम्मन वर्मा एवं संदीप वर्मा द्वारा दी गई।




