🎭 खैरागढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिले नया सम्मान
खैरागढ़।इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के संस्थापक, खैरागढ़ रियासत के दानवीर राजा विरेन्द्र बहादुर सिंह के नाम से कला के क्षेत्र में राज्य स्तरीय सम्मान प्रारंभ किए जाने की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है। कला जगत, बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक संगठनों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में शास्त्रीय एवं ललित कलाओं के संरक्षण-संवर्धन में राजा विरेन्द्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी का योगदान ऐतिहासिक और अतुलनीय रहा है।
चक्रधर कथक कल्याण केंद्र, राजनांदगांव के संस्थापक एवं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों से विनम्र किंतु सशक्त आग्रह किया है।
### 🎶 चक्रधर सम्मान के साथ खैरागढ़ को भी मिले पहचान
डॉ. सिन्हा ने कहा कि जिस प्रकार रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह के नाम से चक्रधर सम्मान प्रदान किया जाता है, उसी तर्ज पर राजा विरेन्द्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी के नाम से भी शास्त्रीय संगीत, नृत्य, ललित कलाओं, कला शिक्षण एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले
* कला साधकों
* कला विद्वानों
* कला गुरुओं
* संगीत एवं नृत्य संस्थानों को सम्मानित किया जाना चाहिए।
### 🏛️ एशिया का पहला संगीत विश्वविद्यालय – खैरागढ़ की पहचान
यह उल्लेखनीय है कि राजा विरेन्द्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी ने अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा की स्मृति में वर्ष 1956 में अपना पैतृक राजमहल दान कर इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
आज यह विश्वविद्यालय एशिया का प्रथम संगीत विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त कर चुका है और देश-विदेश में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
### 🎼 कला बिरादरी की एकजुट आवाज
प्रदेश की कला बिरादरी और बुद्धिजीवी वर्ग का मानना है कि खैरागढ़ की इस ऐतिहासिक विरासत को सम्मान के रूप में स्थायी पहचान मिलनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस सांस्कृतिक योगदान से प्रेरणा ले सकें।
उपरोक्त जानकारी डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा द्वारा जारी एक प्रेस प्रेस वार्ता के माध्यम से दी गई है।




