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खैरागढ़ ! DNnews -केसीजी जिला के ग्राम भीमपुरी में हर साल आयोजित होने वाले दशहरा महोत्सव के लिए यहाँ का नाम सुना जाता है। इस महोत्सव में नामी कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, और ग्रामीण समुदाय इसे दशकों से बरकरार रखते हैं। इस महोत्सव में ग्रामीण समुदाय की एकजुटता देखने को मिलती है, जिसका परिणामस्वरूप हर साल यह कार्यक्रम सफलता प्राप्त करता है।
माँ शीतला समिति: सफलता के पीछे अथक प्रयास
दशहरा महोत्सव के सफल होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है 'माँ शीतला समिति' के सभी सदस्य, जिनके अथक प्रयासों से यह कार्यक्रम हर साल सफलता प्राप्त करता है।
आतिशबाजी और व्यावसायिक प्रतिष्ठा का प्रदर्शन
भीमपुरी दशहरा महोत्सव में रावण वध और आतिशबाजी देखने के लिए लोग उत्सव के मुख्य आकर्षण में से होते हैं। यहाँ पर आतिशबाजी की दिखाए गए कौतुहल का विषय बना रहता है, और इस कार्यक्रम के लिए रातभर दर्ज के लोग बड़ी संख्या में आते हैं। यह उत्सव व्यावसायिक प्रतिष्ठान के लिए भी एक महत्वपूर्ण साधना है, और यह रातभर चलता रहता है।

आकाशवाणी और दूरदर्शन कलाकारों की प्रस्तुति
इस महोत्सव के दौरान, आकाशवाणी और दूरदर्शन के कलाकार कारी बदरिया मोखा के शानदार प्रस्तुति की। युगल किशोर साहू के निर्देशन में, उनकी पूरी टीम ने दर्शकों को रात भर गुदगुदाया, और श्रृंगार, हास्य, करुण, वीर रसो से शुशोभित कार्यक्रम को प्रस्तुत किया, और दर्शक रातभर अपनी जगह पर डटे रहे।
सामाजिक संदेश और दिव्यांग जानो का महत्वपूर्ण रोल
इस अद्वितीय महोत्सव के दौरान, समाज में घटित घटनाओं को फिल्मांकन किया गया, और समाज में होने वाले महत्वपूर्ण समाजिक मुद्दों पर सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया गया। दर्शकों के बीच यह पहली बार हुआ कि रात भर हँसी से सराबोर हो गया है।
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दिव्यांग जनो का विशेष सम्मान
इस महोत्सव में समाज में दिव्यांग जनो को सामान अधिकार के साथ जबरदस्त रोल प्ले किया गया, और दर्शकों को एक नई दिशा की ओर देखने का अवसर मिला। यह एक ऐसा समय था जब दर्शकों ने रात भर हंसी में रहकर खुद को सराबोर किया।
बाप-बेटा की कहानी: प्यार और समझदारी की जीत
एक और दिलचस्प किस्सा भी इस महोत्सव का हिस्सा था, जिसमें एक लालची पिता अपने दिव्यांग बेटे की शादी अपने चिरपरिचित की बेटी से करवाने का प्रयास करता है। जब दिव्यांग बेटा अपनी दिव्यांग पत्नी के साथ घर लौटता है, तो इससे पिता को आपत्ति होती है और वह बेटे और बहु को घर से निकाल देता है। बाद में पिता की आंखे खुल जाता है और अफ़सोस जाहिर करते हुए बेटे-बहु को वापिस बुला लेता है.
The Bhimapuri Dussehra Festival in Keshi Ji district, Khairagarh, has concluded with great success.
The event featured cultural programs, including the burning of Ravana effigies and impressive fireworks.
The festival also highlighted social messages and showcased the importance of understanding and supporting differently-abled individuals.
Notably, a heartwarming story unfolded as a father eventually accepted his differently-abled son's choice of marriage.
This update captures the highlights of the Bhimapuri Dussehra Festival and its unique elements.




