**एक समय की बात है**, एक घने जंगल में एक पेड़ की डाल पर **एक बंदर और बंदरिया** बैठे हुए थे। तभी उसी पेड़ के नीचे **तीन-चार साधुओं** का वहां रुकना हुआ। वे आपस में चर्चा कर रहे थे।
उनकी बातों से बंदर और बंदरिया ने सुना कि,
> **"इस जंगल की झील (तालाब) में एक बहुत बड़ा रहस्य छिपा है। कहते हैं कि आने वाली एक विशेष रात को जो सबसे पहले इस झील में छलांग लगाएगा, वही जंगल का अगला राजा या रानी बनेगा।"**
बंदर और बंदरिया चुपचाप ये सब सुन रहे थे। संयोग से वह विशेष रात **अब से सिर्फ दो-तीन दिन बाद** आने वाली थी। दोनों सोचने लगे —
> **"क्यों न हम दोनों एक साथ छलांग लगाएं? अगर किस्मत रही तो हम दोनों ही राजा और रानी बन जाएंगे।"**
दोनों ने मन ही मन यह तय कर लिया कि जब वह रात आएगी, तो वे **एक साथ 1…2…3 गिनकर तालाब में छलांग** लगाएंगे।
आखिरकार वो रात आ ही गई।
बंदर और बंदरिया अपने वादे के अनुसार पेड़ पर चढ़े। जैसे ही वो **विशेष समय** आया, दोनों ने साथ में गिनती की —
> **"एक… दो… तीन!"**
> और **बंदरिया ने छलांग लगा दी।**
कुछ समय बाद बंदरिया **तालाब से रानी बनकर** बाहर निकली। उसने इधर-उधर देखा और सोचा कि शायद उसका बंदर भी छलांग लगाकर **राजा बन गया होगा**। लेकिन आसपास बंदर दिखाई नहीं दिया।
थोड़ी दूर देखने पर बंदरिया को वही बंदर **उसी पेड़ की डाल पर बैठा** नजर आया।
वह हैरान होकर बंदर से पूछती है:
> **"तुमने छलांग क्यों नहीं लगाई?"**
बंदर ने जवाब दिया:
> **"मैं डर गया था… मैंने सोचा अगर छलांग लगाकर भी राजा नहीं बन पाया, तो क्या होगा?"**
इस पर बंदरिया ने मुस्कुराकर बेहद **सुंदर और गहरा उत्तर** दिया:
> **"अरे पागल! अगर छलांग लगाकर राजा नहीं बन पाते… तो क्या?**
> **तुम बंदर तो रहते ना!"**
### 📚 **इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?**
1. **जोखिम उठाए बिना सफलता नहीं मिलती।**
2. अगर आप डर के कारण कदम पीछे खींचते हैं, तो शायद आप अपनी **किस्मत से मिलने वाले मौके को खो देते हैं।**
3. असफलता से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि **कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।**
4. **जोखिम लेने से कुछ खो भी गया, तब भी आप वहीं के वहीं नहीं रहेंगे — बल्कि सीखकर आगे बढ़ेंगे।**
🌟 **याद रखिए:**
> **"जो डर गया… वो रह गया!"**
> **"जो कूद गया… वो कुछ बन गया!"**




