📍 बिना लाइसेंस और प्रिंसिपल सर्टिफिकेट के चल रहे कृषि केंद्र, किसानों को हो रहा भारी नुकसान
खैरागढ़, ग्राम डुंडा निवासी किसान गजेश कुमार वर्मा की मेहनत पर तब पानी फिर गया, जब उन्होंने अतरिया क्षेत्र के पन्ना कृषि केंद्र से खरीदी गई कीटनाशक दवा का छिड़काव अपनी छह एकड़ धान की फसल पर किया — और फसल पीली पड़कर सूखने लगी।
गजेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने 11 और 16 सितंबर 2025 को कुल ₹17,010 की दवाएं खरीदीं और मजदूरों से छिड़काव कराया। परिवार में गमी के चलते वे कुछ दिन खेत नहीं जा सके। लेकिन 2 अक्टूबर को जब वे खेत पहुँचे, तो पाया कि धान की पूरी फसल मुरझाकर पीली हो गई है।
उन्होंने इसकी सूचना जब दुकान संचालक राजकुमार वर्मा और कर्मचारी धनंजय कोसरे को दी, तो न केवल सहायता से इंकार किया गया बल्कि अपमानजनक भाषा में जवाब मिला ADS
"जा, जो करना है कर ले, कोई मुआवजा नहीं मिलेगा!"
💸 कुल नुकसान 4.65 लाख रुपये का, शिकायत लेकर पहुंचे कलेक्टर कार्यालय
किसान ने बताया कि फसल बचाने के लिए उन्होंने बाद में ₹14,400 की और दवा भी खरीदी, लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हुआ और 3 अक्टूबर तक फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी।
इस प्रकार उन्होंने कुल ₹34,060 की दवाएं खरीदीं, लेकिन कुल नुकसान करीब ₹4.65 लाख रुपये का हो गया।
गजेश वर्मा ने इस मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर और कृषि विभाग को दी है और दवाओं की रसीदें भी साक्ष्य के तौर पर संलग्न की हैं।
🚨 खुलेआम हो रहा नकली दवाओं का कारोबार, विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में
जानकारों के अनुसार अतरिया, खैरागढ़ और आसपास के कई क्षेत्रों में बिना किसी वैध प्रिंसिपल सर्टिफिकेट के कृषि केंद्र संचालित हो रहे हैं।
- 300 रुपये की दवा को 1000 रुपये में बेचा जा रहा है।
- कच्चे बिल (बिना GST) थमाकर धोखाधड़ी की जा रही है।
- लाइसेंस महिला के नाम पर, दुकान चला रहे हैं पुरुष।
स्थानीय किसान हितेश वर्मा का कहना है:
“दुकानदार अंग्रेजी में तकनीकी नाम बताकर भ्रम फैलाते हैं और गलत दवा थमा देते हैं।”
🧑⚖️ जांच की तैयारी में प्रशासन, कृषि अधिकारी पहुंचे हरकत में
कीटनाशक निरीक्षक लुकमान साहू ने पुष्टि की कि:
“शिकायत प्राप्त हुई है। कल स्वयं खेत और कृषि केंद्र की जांच करूँगा। देखा जाएगा कि कौन-सी दवा दी गई और क्या वह अधिकृत कंपनी की थी।”
उन्होंने यह भी कहा कि सभी कृषि केंद्रों को दवा बेचने के लिए प्रिंसिपल सर्टिफिकेट अनिवार्य है, और जिन दुकानों में खामी पाई गई है, उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं।
🗣️ "जागरूकता शिविर होते, तो बच सकते किसान" – कृषि समिति के सभापति
जिला पंचायत सदस्य और कृषि समिति के सभापति दिनेश वर्मा ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए कहा:
“अगर विभाग नियमित जागरूकता शिविर लगाता, तो आज यह दिन न देखना पड़ता। अगर एक किसान की फसल बर्बाद हुई है, तो हो सकता है अन्य किसान भी प्रभावित हुए हों। जांच जरूरी है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।”
📢 कब जागेगा प्रशासन?
खैरागढ़ और अतरिया जैसे क्षेत्रों में किसान जागरूकता, पारदर्शिता और संरक्षण के अभाव में लगातार ठगे जा रहे हैं। बिना प्रमाणपत्र, बिना प्रशिक्षण और बिना नैतिक ज़िम्मेदारी के कृषि केंद्रों की मनमानी पर प्रशासन की चुप्पी खतरनाक संकेत दे रही है।
अब देखना यह है कि क्या गजेश वर्मा को न्याय मिलेगा, या यह शिकायत भी फाइलों में दबी रह जाएगी।
📸 यदि आपके पास ऐसी ही कोई घटना है, तो हमें ज़रूर बताएं – किसान की आवाज़ को दबने न दें।
📧 संपर्क करें: Dinesh Sahu 9098981250




